Pages ( प्रश्न और उत्तर )

Saturday, 27 October 2012

आज फिर आ गयी उनकी याद.....

लो फिर आ गयी उनकी याद,
वो नहीं आये .....................

क्या सोचने लगे जनाब? कहीं ऐसा तो नहीं सोचने लगे -मुझे आपकी याद आ गयी हो?
अगर ऐसा ही सोच रहे तो आप गलत सोच रहे हो?
बुरा लगा पढ़कर ? सही कहा न मैंने?
अगर आपको बुरा तब भी गलत सोच रहे हो। पहले पूरा लेख तो पढो कि बस मुंह फुला लिया।

याद तो उन्हें किया जाता है जिन्हें भुला दिया जाता है।
आप तो हर पल हमारे दिल के करीब रहते हैं- बोले तो भुलाया ही नहीं आपको तो फिर याद करने की आवश्यकता।
अब तो मुस्करा दो।
हा हा हा हा .......देखो मैं कितना दुखी और सीरियस हूँ फिर भी हंस रहा हूँ।
चलो मेरे साथ-साथ आप भी हसो .....

चोरी-चोरी अकेले हंस लिए और मुझसे यह भी पूछा कि- मुझे किसकी याद आ गयी ? और क्यों आ गयी? और उसको याद करने से मैं सीरियस क्यों हो गया?
मत पूछो मैं ही बता देता हूँ- क्योंकि मैं तो बेशर्म हूँ ही, आपके अनुसार ....

तो मैं शुरू क्या बताना ???

अरे कोई एक कमेंट तो डाल दो .....

Wednesday, 10 October 2012

आशा और निराशा का फेर

 हमारे देश में कोल्हू में तेल निकलने के लिए बैल को गोल गोल घुमाया जाता है।बैल  के गले पर जुआ होता है। जुए का एक सिरा आगे बढ़ा होता है। उसके एक सिरे पर घास बांध दी जाती है। फिर बैल की आंख को इस तरह बांध देते हैं कि केवल सामने की घास को ही देख सके। बैल घास खाने  आगे बढ़ता है, परन्तु वह घास उसके पास कभी नहीं आती। वह गोल गोल चक्कर लगाता चला जाता है।

 हमारी हालत भी ठीक ऐसी है। कैसे?

Wednesday, 19 September 2012

क्या सपने कभी साकार होते हैं?

     प्रिय दोस्तों!!

     आज मैंने एक शख्स के मुह यह सुना, "सपने कभी साकार नहीं होते हैं?"
क्या आप भी यही मानते हैं? अगर हाँ, तो मैं आपकी बात से सहमत नहीं हूँ।
क्योंकि सपने भी दो प्रकार के होते हैं---

     1. बंद आँखों से (सोते हुए) देखा गया सपना,
     2. खुली आँखों से देखा गया सपना
     बंद आँखों से देखा गया सपना पूरा हो न हो, लेकिन खुली आँखों से देखा गया सपना जरुर पूरा किया जा सकता है। अब आप सोच रहे होंगे कि खुली आँखों से कौन से सपने देखे जाते हैं? आईये मैं आप को बताता हूँ। खुली आँखों से देखे जाने वाले सपनो से मेरा अभिप्राय उन तमाम चीजों से है जिनके बारे में सोचकर ही हम रोमांचित हो जाते हैं, जैसे कि- बंगला, गाडी, बैंक बैलेंस ...आदि।

हर इन्सान इन चीजों को पाने के लिए मचलता है, लेकिन अगले ही पल कहता है, "क्यों मैं इनके बारे में सोच रहा हूँ , क्यों ऐसे सपने देख रहा हूँ जो कभी पुरे नहीं हो सकते?" वह ऐसा इसलिए कहता है, क्योंकि उसका सोचना है कि सपने कभी पुरे नहीं होते , परन्तु मेरा कहना है कि अगर इन्सान चाहे तो क्या नहीं कर सकता? अगर वह चाहे तो इस दुनिया को भी बदल सकता है, सपने तो बहुत छोटी सी बात है।

किसी काम में सफलता यूँही नहीं मिल जाती। ऐसे चांसेस न के बराबर होते हैं कि जिस काम को हम करना कहते हैं और वो अनायास ही हो जाता है और हमें एफ्फोर्ट्स नहीं लगाने पड़ते। परन्तु किसी काम में सफलता पाने के लिए हमें दो चीजों (Fectors ) की आवश्यकता होती है ---
    1. Planning
    2. Action
इन दोनों को एक सही percentage में Distribute करके काम किया  तो कोई भी और कितना भी जटिल या मुश्किल सपना भी पूरा किया जा सकता है।

इन्सान जब यह कहता है की वो काम तो कभी नहीं किया जा सकता, तो इसके पीछे मुख्य वजह होती है-- ऊपर बताये गए दोनों fectors का सही तरीके से उपयोग न कर पाना । कोई तो केवल plannings कर पाता है, Action नहीं, तो कोई केवल Action परन्तु प्लान्निंग्स नहीं और कोई कोई तो इनमे से कोई भी नहीं। अब सोचने की बात है, जब किसी काम को गलत तरीके से या अधूरे तरीके से किया जाये तो कैसे वो कार्य पूरा हो सकता है?  फिर कहते हैं "सपने कभी पुरे नहीं होते हैं, ऐसे सपने देखने भी नहीं चाहिए जो पुरे नहीं हो सकते हैं।" आप ने उनको पूरा करने का दिल से प्रयास ही नहीं किया  अथवा गलत ट्रैक पर किया तो कैसे पूरा हो जायेंगे?

मानता हूँ कुछ कार्य इन्सान की हद से बाहर हैं, जैसे-"चाँद को तोड़कर लाना" परन्तु ऊपर बताई गयी चीजों को तो हासिल किया जा सकता है। और आज हमारे सम्मुख ऐसे अनेको प्रमाण हैं, जिन्होंने हर मुश्किल से टकराते हुए अपने सपनों को पूरा कर दिखाया है--टाटा, बिडला, अम्बानी ....आदि, तो फिर हम और आप क्यों नहीं?

अतः दोस्तों! आपको अपने अन्दर एक जज्वा पैदा करना है और अपने आप से बार बार कहते रहना है- मैं कर सकता हूँ ( I can do).

Next लेख में आप पढेंगे--"कैसे करें अपने सपनो को साकार?"

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Monday, 17 September 2012

यह पानी पर तैर नहीं सकता ।

दो दोस्त थे और दोनों ही शिकारी थे। एक बार एक शिकारी को एक कुत्ता मिला। अब आप सोच  रहे होंगे की कुत्ता मिलना इतना  कठिन काम तो नहीं, लेकिन उस कुत्ते एक विलाक्षद प्रतिभा थी और वो यह कि वह कुत्ता पानी पर चल सकता था। शिकारी उस कुत्ते को पा कर बहुत खुश हुआ। उसने सोचा की वह अपने दोस्त को surprize देगा। अतः उसने अपने मित्र को घर पर चाय पर बुलाया। दोनों घर के पास वाले तालाब के किनारे पर बेठ गए। तभी तालाब में एक पक्षी तैर रहा था । शिकारी  सोचा यही उचित  मौका है surprize देने का।उसने कुत्ते को इशारा किया तो कुत्ता पानी पर दौड़ते हुए गया और पक्षी को पकड़कर शिकारी के पास ले आया।शिकारी ने अपने दोस्त से पूछा, "आप को इस कुत्ते में कुछ खूबी देखी?" तब उसका दोस्त बोला  खूबी तो है कि यह पानी पर चल सकता है, परन्तु इसमें एक कमी है, यह पानी पर तैर नहीं सकता ।

दोस्तों, आपने इस कहानी से क्या निष्कर्ष निकला?

Sunday, 9 September 2012

मेरी एक और नयी फोटो



यह मेरी नयी फोटो जो मैंने कल ही अपलोड की है।  कमेंट्स अवश्य करें।

Thursday, 30 August 2012

मेरा नया फोटो

मेरा नया फोटो जिसको मेरे फ्रेंड ने अपने मोबाइल फ़ोन से capture किया   था उसके फ़ोन में मेरे contact नंबर पर सेट करने के लिए। वही फोटो मैं यहाँ शेयर कर रहा हूँ, मेरे फ्रिएंड्स के लिए .....यह फोटो आज 30/08/2012 को 3:12 pm पर capture  किया था।

Wednesday, 29 August 2012

Two shayari.....

Bewafa Love Shayari हम भी कभी मुस्कराया करते थे,
उजाले में भी शोर मचाया करते थे,
उसी दिये  ने जला दिए मेरे हाथ।
जिसको हम हवा से बचाया कतरे थे।।

न मिला गम तो बर्बादी के फ़साने कहाँ जाते,
दुनिया अगर होती चमन तो वीराने कहाँ जाते,
चलो अच्छा हुआ अपनों में कोई तो गैर निकला ?
अगर सभी होते अपने तो बेगाने कहाँ जाते।।

-आशीष शर्मा

सारे ख्वाब तेरे हैं...

Tanhaai ShayariSaare Shikwe Janab Tere Hai,
Dil Pe Saare Azaab Tere Hai,
Tum Yaad Aao To Nind Nahi Aati,
Nind Aaye To Saare Khwab Tere Hai...

सारे शिकवे जनाब तेरे हैं ,
दिल पे सारे अजाब तेरे हैं।
तू  ना आये तो नींद नहीं आती ,
नींद आये तो सारे ख्वाब तेरे हैं...

--आशीष  शर्मा

पर हम से नहीं....


Sher Shayariवो आते तो थे पर समय से नहीं,
वो साथ चलते तो पर दिल से नहीं।
कौन कहता है वो प्यार नहीं करते थे,
वो प्यार करते तो थे पर हम से नहीं।।

- आशीष शर्मा

Ek tukda aaj bhi us ke paas hai…

SMS in Hindi
Har phool ki ajab kahani hai,
Chup rehna bhi pyar ki nishani hai,
Kahi koi zakhm nahi phir bhi kyu yeh ehsas hai,
Lagta hai dil ka ek tukda aaj bhi us ke paas hai…

Monday, 27 August 2012

हिंदू धर्म - एक विशेष परिचय

प्रिय दोस्तो !!!
वैसे तो मैं इंसानियत में विश्वास करता हूँ, परन्तु facebook पर एक मुस्लिम फ्रेंड को मजहब के  नाम पर उल्टी सीधि बाते करते हुए देख कर यह पोस्ट टाइप करने पर मजबूर हो गया। उस मुस्लिम फ्रेंड को यह कहते पाया की "हिन्दू" का meaning क्या है ? तो मैं बताता हूँ "हिन्दू " का meaning .......

      वैदिक काल में भारतीय उपमहाद्वीप के धर्म के लिये 'सनातन धर्म' नाम मिलता है। 'सनातन' का अर्थ है - शाश्वत या 'हमेशा बना रहने वाला', अर्थात् जिसका न आदि है न अन्त। सनातन धर्म मूलत: भारतीय धर्म है, जो किसी ज़माने में पूरे वृहत्तर भारत (भारतीय उपमहाद्वीप) तक व्याप्त रहा है। विभिन्न कारणों से हुए भारी धर्मान्तरण के बाद भी विश्व के इस क्षेत्र की बहुसंख्यक आबादी इसी धर्म में आस्था रखती है। सिन्धु नद पार के वासियो को ईरानवासी हिन्दू कहते, जो 'स' का उच्चारण 'ह' करते थे। उनकी देखा-देखी अरब हमलावर भी तत्कालीन भारतवासियों को हिन्दू, और उनके धर्म को हिन्दू धर्म कहने लगे। भारत के अपने साहित्य में हिन्दू शब्द कोई 1000 वर्ष पूर्व ही मिलता है, उसके पहले नहीं।

    प्राचीन काल में भारतीय सनातन धर्म मेंगाणपतय, शैव वैष्णव,शाक्त और सौर नाम के पाँच सम्प्रदाय होते थे।गाणपतयगणेशकी वैष्णव विष्णु की, शैव शिव की और शाक्त शक्ति और सौर सूर्य की पूजा आराधना किया करते थे। पर यह मान्यता थी कि सब एक ही सत्य की व्याख्या हैं। यह न केवल ऋग्वेद परन्तु रामायण और महाभारत जैसे लोकप्रिय ग्रन्थों में भी स्पष्ट रूप से कहा गया है। प्रत्येक सम्प्रदाय के समर्थक अपने देवता को दूसरे सम्प्रदायों के देवता से बड़ा समझते थे और इस कारण से उनमें वैमनस्य बना रहता था। एकता बनाए रखने के उद्देश्य से धर्मगुरूओं ने लोगों को यह शिक्षा देना आरम्भ किया कि सभी देवता समान हैं, विष्णु, शिव और शक्ति आदि देवी-देवता परस्पर एक दूसरे के भी भक्त हैं। उनकी इन शिक्षाओं से तीनों सम्प्रदायों में मेल हुआ और सनातन धर्म की उत्पत्ति हुई। सनातन धर्म में विष्णु, शिव और शक्ति को समान माना गया और तीनों ही सम्प्रदाय के समर्थक इस धर्म को मानने लगे। सनातन धर्म का सारा साहित्य वेद, पुराण, श्रुति, स्मृतियाँ,उपनिषद्, रामायण, महाभारत, गीता आदि संस्कृत भाषा में रचा गया है। कालान्तर में भारतवर्ष में मुसलमान शासन हो जाने के कारण देवभाषा संस्कृत का ह्रास हो गया तथा सनातन धर्म की अवनति होने लगी। इस स्थिति को सुधारने के लिये विद्वान संत तुलसीदास ने प्रचलित भाषा में धार्मिक साहित्य की रचना करके सनातन धर्म की रक्षा की। जब औपनिवेशिक ब्रिटिश शासन को ईसाई, मुस्लिम आदि धर्मों के मानने वालों का तुलनात्मक अध्ययन करने के लिये जनगणना करने की आवश्यकता पड़ी तो सनातन शब्द से अपरिचित होने के कारण उन्होंने यहाँ के धर्म का नाम सनातन धर्म के स्थान पर हिंदू धर्म रख दिया।

सनातन धर्म हिन्दू धर्म का वास्तविक नाम है।

    हिंदू धर्म भी धार्मिक अलग समय और जीवन की घटनाओं, और मौत के लिए अपने अनुयायियों द्वारा निष्पादित समारोह में बहुत विविधता है. हिंदुओं के प्रधान विनोद भी क्षेत्र से क्षेत्र में जो दीवाली, शिवरात्रि, रामनवमी, जन्माष्टमी, गणपति, दुर्गापूजा, होली, नवरात्री आदि शामिल हैं, भी  भिन्न हैं । 

    सनातन धर्म की गुत्थियों को देखते हुए इसे प्रायः कठिन और समझने में मुश्किल धर्म समझा जाता है। हालांकि, सच्चाई ऐसी नहीं है, फिर भी इसके इतने आयाम, इतने पहलू हैं कि लोगबाग इसे लेकर भ्रमित हो जाते हैं। सबसे बड़ा कारण इसका यह कि सनातन धर्म किसी एक दार्शनिक, मनीषा या ऋषि के विचारों की उपज नहीं है (अन्य धर्मों की तरह )। न ही यह किसी ख़ास समय पैदा हुआ (मुस्लिम, शिक्ख, बौद्ध, जैन ..आदि धर्मों की तरह)। यह तो अनादि काल से प्रवाहमान और विकासमान रहा। साथ ही यह केवल एक द्रष्टा, सिद्धांत या तर्क को भी वरीयता नहीं देता। कोई एक विचार ही सर्वश्रेष्ठ है, यह सनातन धर्म नहीं मानता। इसी वजह से इसमे कई सारे दार्शनिक सिद्धांत मिलते हैं। इसके खुलेपन की वजह से ही कई अलग-अलग नियम इस धर्म में हैं। इसकी यह नरमाई ही इस के पतन का कारण रही है, औ यही विशेषता इसे अधिक ग्राह्य और सूक्ष्म बनाती है। इसका मतलब यह है कि अधिक सरल दिमाग वाले इसे समझने में भूल कर सकते हैं। अधिक सूक्ष्म होने के साथ ही सनातन धर्म को समझने के कई चरण और प्रक्रियाएं हैं, जो इस सूक्ष्म सिद्धांत से पैदा होती हैं। हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि सरल-सहज मस्तिष्क वाले इसे समझ ही नहीं सकते। पूरी गहराई में जानने के लिए भले ही हमें गहन और गतिशील समझदारी विकसित पड़े, लेकिन सामान्य लोगों के लिए भी इसके सरल और सहज सिद्धांत हैं। सनातन धर्म कई बार भ्रमित करनेवाला लगता है और इसके कई कारण हैं। अगर बिना इसके गहन अध्ययन के आप इसका विश्लेषण करना चाहेंगे, तो कभी समझ नहीं पाएंगे। इसका कारण यह कि सनातन धर्म सीमित आयामों या पहलुओं वाला धर्म नहीं है। यह सचमुच ज्ञान का समुद्र है। इसे समझने के लिए इसमें गहरे उतरना ही होगा। सनातन धर्म के विविध आयामों को नहीं जान पाने की वजह से ही कई लोगों को लगता है कि सनातन धर्म के विविध मार्गदर्शक ग्रंथों में विरोधाभास हैं। इस विरोधाभास का जवाब इसीसे दिया जा सकता है कि ऐसा केवल सनातन धर्म में नहीं। कई बार तो विज्ञान में भी ऐसी बात आती है। जैसे, विज्ञान हमें बताता है कि शून्य तापमान पर पानी बर्फ बन जाता है। वही विज्ञान हमें यह भी बताता है कि पानी शून्य डिग्री से भी कम तापमान पर भी कुछ खास स्थितियों में अपने मूल स्वरूप में रह सकता है। इसका जो जवाब है, वही सनातन धर्म के संदर्भ में भी है। जैसे, विज्ञान के लिए दोनों ही तथ्य सही है, भले ही वह आपस में विरोधाभासी हों, और विज्ञान के नियमोंको झुठलाते हों। उसी तरह सनातन धर्म भी अपने खुलेपन की वजह से कई सारे विरोधी विचारों को ख़ुद में समेटे रहता है। परन्तु सनातनधर्म में जो तत्व है, उसे नकारा भी तो नही जा सकता। हम पहले भी कह चुके हैं-एकं सत्यं, बहुधा विप्रा वदंति-उसी तरह किसी एक सत्य के भी कई सारे पहलू हो सकते हैं। कुछ ग्रंथ यह कह सकते हैं कि ज्ञान ही परम तत्व तक पहुंचने का रास्ता है, कुछ ग्रंथ कह सकते हैं कि भक्ति ही उस परमात्मा तक पहुंचने का रास्ता है। सनातन धर्म में हर उस सत्य या तथ्य को जगह मिली है, जिनमें तनिक भी मूल्य और महत्व हो। इससे भ्रमित होने की ज़रूरत नहीं है। आप उसी रास्ते को अपनाएं जो आपके लिए सही और सहज हो। याद रखें कि एक रास्ता अगर आपके लिए सही है, तो दूसरे सब रास्ते या तथ्य ग़लत हैं, सनातन धर्म यह नहीं मानता। साथ ही, सनातन धर्म खुद को किसी दायरा या बंधन में नहीं बांधता है। ज़रूरी नहीं कि आप जन्म से ही सनातनी हैं। सनातन धर्म का ज्ञान जिस तरह किसी बंधन में नहीं बंधा है, उसी तरह सनातन धर्म खुद को किसी देश, भाषा या नस्ल के बंधन में नहीं बांधता। सच पूछिए तो युगों से लोग सनातन धर्म को अपना रहे हैं। सनातनधर्म के नियमों का यदि गहराई से अध्ययन किया जाए तो मन स्वयँ ही इसकी सचाई को मानने को तैयार हो जाता है। विज्ञान जिस तरह बिना ज्ञान के अधूरा है। सनातन धर्म भी बिना ज्ञान हानि कारक है। ज्ञान मनुष्य के आस-पास होता है। उसके भीतर होता है। इस का एक उदाहरण देखिये- हवन, यज्ञ आदि का शास्त्रों में कोई विधि विधान कहा गया है। कि इसे किस महूर्त में किस आसन पर बैठ कर किस प्रकार के भोजन का इस्तेमाल करते हुए करना चाहिए, इतना सा ज्ञान तो कुछ पेचीदा नही है। परन्तु इस ज्ञान के बिना किये गये हवन, यज्ञ हानि ही करेंगे, यह ज्ञान भी पेचीदा नही है। देखने सुनने में आता है कि अज्ञानी लोग प्रति दिन आर्यसमाज, मन्दिरों, घरों, में नित्य-नियम बनाकर हवन, यज्ञ आदि करते रहते हैं। जब अनिष्ट फल प्राप्त होता है, तब सनातन धर्म क़ी नरमाई का लाभ उठाते हुए सनातन धर्म का त्याग कर देते हैं, और इस पुरातन सनातन धर्म क़ी खामियाँ तलाशने लगते है जबकि सनातन धर्म अपने आप में सम्पूर्ण सत्य धर्म है।

किसी को कोई आपत्ति या विचार प्रस्तुत करना हो तो कमेंट्स द्वारा प्रस्तुत करें।

-आशीष शर्मा

Wednesday, 15 August 2012

स्वतंत्र भारत का राष्ट्रीय ध्वज (Interesting Story)

* सन्‌ 1921 में गांधी जी द्वारा राष्ट्रीय ध्वज के लिए इस झंडे की पेशकश की गई।
* सन्‌ 1931 में कांग्रेस द्वारा राष्ट्रीय ध्वज के लिए पारित स्वराज झंडा।

* सन्‌ 1947 से इस ध्वज को स्वतंत्र भारत का राष्ट्रीय ध्वज स्वीकार किया गया


हमारे देश की शान तिरंगा झंडा। स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आज तक तिरंगे की कहानी में कई रोचक मोड़ आए। पहले उसका स्वरूप कुछ और था और आज कुछ और है। आज देश 65वां स्वतंत्रता दिवस समारोह मना रहा है लेकिन बहुत ही कम लोगों को अपने राष्ट्रीय ध्वज के बारे में पूरी जानकारी है।

पेश है अपने पाठकों के लिए तिरंगे की कहानी के रूप में कुछ जानकारियां...

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बापू की पेशकश :-
सबसे पहले देश के राष्ट्रीय ध्वज की पेशकश 1921 में महात्मा गांधी ने की थी। जिसमें बापू ने दो रंग के झंडे को राष्ट्रीय ध्वज बनाने की बात कही थी।

इस झंडे को मछलीपट्टनम के पिंगली वैंकैया ने बनाया था।

दो रंगों में लाल रंग हिन्दू और हरा रंग मुस्लिम समुदाय का प्रतिनिधित्व करता था। बीच में गांधी जी का चरखा था, जो इस बात का प्रमाण था कि भारत का झंडा अपने देश में बने कपड़े से बना।

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स्वराज झंडा फिर बना :-
इसके बाद स्वतंत्रता के आंदोलन के अंतर्गत खिलाफत आंदोलन में तीन रंगों के स्वराज झंडे का प्रयोग किया गया। खिलाफत आंदोलन में मोतीलाल नेहरू ने इस झंडे को थामा और बाद में कांग्रेस ने 1931 में स्वराज झंडे को ही राष्ट्रीय ध्वज की स्वीकृति दी।

जिसमें ऊपर केसरिया बीच में सफेद और नीचे हरा रंग था। साथ ही बीच में नीले रंग से चरखा बना हुआ था।
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नया तिरंगा 1947 में आया :- देश के आजाद होने के बाद संविधान सभा में पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 22 जुलाई 1947 में वर्तमान तिरंगे झंडे को राष्ट्रीय ध्वज घोषित किया।

जिसमें तीन रंग थे। ऊपर केसरिया, बीच में सफेद और नीचे हरा रंगा। सफेद रंग की पट्टी में नीले रंग से बना था अशोक चक्र जिसमें चौबीस तीलियां थीं जो धर्म और कानून का प्रतिनिधित्व करती थीं।

राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का वही स्वरूप आज भी मौजूद है।

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झंडा खादी का बनेगा :-
स्वराज झंडे पर आधारित तिरंगे झंडे के नियम-कानून फ्लैग कोड ऑफ इंडिया द्वारा बनाए गए। जिसमें निर्धारित था कि झंडे का प्रयोग केवल स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के अवसर पर ही किया जाएगा।

इसके बाद 2002 में नवीन जिंदल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई। जिसके पक्ष में सुप्रीम कोर्ट ने भारत सरकार को निर्देश दिए कि अन्य दिनों में भी झंडे का प्रयोग नियंत्रित रूप में हो सकता है। इसके बाद 2005 में जो सुधार हुआ, उसके अंतर्गत कुछ परिधानों में भी तिरंगे झंडे का प्रयोग किया जा सकता है।

केवल कागज का प्रयोग हो :- भारतीय ध्वज संहिता के प्रावधान के अनुरूप नागरिकों एवं बच्चों से शासन की अपील है कि वे स्वतंत्रता दिवस पर केवल कागज के बने राष्ट्रीय ध्वज का ही उपयोग करें।

साथ ही कागज के झंडों को समारोह संपन्न होने के बाद न विकृत किया जाए और न ही जमीन पर फेंका जाए। ऐसे झंडों का निपटान उनकी मर्यादा के अनुरूप ही किया जाना चाहिए।

आमजन से आग्रह है कि वे स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्लास्टिक से बने झंडों का उपयोग बिलकुल ही न करें, क्योंकि प्लास्टिक से बने झंडे लंबे समय तक नष्ट नहीं होते हैं और जैविक रूप से अपघट्य न होने के कारण ये वातावरण के लिए हानिकारक होते हैं।

साथ ही इधर-उधर पड़े रहने से राष्ट्रीय ध्वज की गरिमा को आघात पहुंचता है।

Monday, 13 August 2012

जन-गण-मन : एक परिचय

जन-गण-मन : एक परिचय
हमारे राष्ट्रगान हमारे राष्ट्रगान जन-गण-मन में 'अधिनायक; शब्द पर एक विवाद आजादी के पहले से चल रहा है। सन 1911 से लेकर अब तक ये आरोप लगता रहा है कि 'जन-गण-मन', ब्रिटिश जॉर्ज पंचम के सम्मान में लिखा गया था। स्वाधीनता दिवस से ठीक पहले इंटरनेट पर हजारों लोगों को फिर इस तरह के ईमेल पहुंच रहे हैं कि राष्ट्रगान जॉर्ज के लिए लिखा गया था। इस तरह के विवाद कहीं-न-कहीं जन-गण-मन की गरिमा को ठेस पहुंचा रहे हैं।

ND



इस विवाद का अंत तभी संभव है, जब आरोप लगाने वाले और खंडन करने वाले अपनी बात को साबित करें। जानिए जन-गण-मन पर हुए विवाद के बारे में और साथ ही यह भी जानिए कि युवा इस विवाद को लेकर क्या नजरिया रखते हैं।

राष्ट्रगान को लेकर विवाद की जड़ें 27 दिसंबर 1911 को फैलना शुरू हुई थीं। इस दिन कांग्रेस के 27वें अधिवेशन में इस गान को सार्वजनिक रूप से पहली बार गाया गया था। इसके ठीक दूसरे दिन कई अखबारों ने लिखा कि टैगोर ने यह गान जॉर्ज पंचम को खुश करने के लिए लिखा है। इसके साथ ही देशभर में यह विवाद शुरू हो गया कि भारत का भाग्यविधाता कौन है? टैगोर ने आरोपों को बेबुनियाद बताया, लेकिन विरोध जारी रहा।

गीत के अंग्रेजी अनुवाद में टैगोर ने राज राजेश्वर को किंग ऑफ ऑल किंग्स लिखकर विरोधों को और हवा दे दी। टैगोर के समर्थकों ने भी अपनी ओर से आरोपों के सटीक जवाब दिए, लेकिन अफसोस कि विवाद 2011 में भी जस का तस बना हुआ है। 1947 में असेंबली में इस बात पर लंबी बहस चली कि राष्ट्रगान वंदे मातरम हो या जन-गण-मन। अंत में ज्यादा वोट वंदे मातरम के पक्ष में पड़े, लेकिन जवाहरलाल नेहरू जन गण मन को ही राष्ट्रगान बनाना चाहते थे।


टैगोर का पत्र-
* 1914 में जॉन मुरे ने द हिस्टोरिकल रिकॉर्ड ऑफ इंपीरियल विजिट टू इंडिया में दिल्ली दरबार का विवरण प्रकाशित किया था और उसमें कहीं भी जन-गण-मन का जिक्र नहीं है। दरअसल 1911 के कांग्रेस के मॉडरेट नेता चाहते थे कि अधिवेशन के मंच से सम्राट दंपति का महिमामंडन भी किया जाए, लेकिन इस बात के लिए टैगोर कभी तैयार नहीं हुए।

लेखक राजीव दीक्षित के एक व्याख्यान में लिखा है कि इस गीत को लिखने के लिए अंग्रेजों ने टैगोर पर दबाव बनाया था। राजीव कहते हैं कि खुद टैगोर ने लंदन में रहने वाले अपने बहनोई को पत्र लिखकर इस बारे में बताया था। अंग्रेज अधिकारियों ने उन पर दबाव बनाया था कि वे वंदे मातरम की टक्कर में ऐसा गीत लिखें, जिसमें जॉर्ज पंचम की प्रशंसा हो।

क्या छपा था अखबार में-
* अधिवेशन की कार्रवाई रवींद्रनाथ टैगोर के लिखे एक गीत से शुरू हुई। टैगोर का यह गीत राजा पंचम जॉर्ज के स्वागत के लिए खास तौर से लिखा गया था।
-28 दिसंबर 1911 द इंग्लिश मैन (कलकत्ता)

* कांग्रेस का अधिवेशन टैगोर के लिखे एक गीत से शुरू हुआ। जॉर्ज पंचम के लिए लिखा यह गीत अंग्रेज प्रशासन ने बेहद पसंद किया है।
- 28 दिसंबर 1911 अमृत बाजार पत्रिका (कलकत्ता)

* भारत के मुक्ति संग्राम में १९११ का साल बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ। इस साल जॉर्ज पंचम भारत आए और बंग-भंग का निर्णय रद्द हुआ। इससे भारतीयों में अंग्रेजों के न्याय के प्रति भरोसा पैदा हुआ।
-मदनलाल वर्मा की किताब स्वाधीनता संग्राम के क्रांतिकारी साहित्य का इतिहास का एक अं

* भारत के राष्ट्रगान के संदर्भ में जो भी विवाद हैं वो अपनी जगह हैं, लेकिन अब भारतीयों को इस गान को स्वीकार कर लेना चाहिए। रवींद्र साहित्य का साधारण विद्यार्थी भी जानता है कि राज राजेश्वर ईश्वर को भी कहा जाता है।
-साहित्यकार हजारी प्रसाद द्विवेदी (1948)

जन-गण-मन : एक परिचय
बांग्ला साहित्य के शिरोमणि कवि रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा रचित जन-गण-मन एक विशिष्ट कविता है। इस कविता के पहले छंद को राष्ट्रगान के रूप में गाया जाता है।

कवि रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा रचित
गायन अवधि- 52 सेकंड
24 जनवरी 1950 को राष्ट्रगान को मान्यता
27 दिसंबर 1911 को कांग्रेस के अधिवेशन में पहली बार गाया गया
संगीत में पांच अंतरें हैं
कंपोजर- रामसिंह ठाकुर

Aap bhi apni raay dena na bhule comments ke dwara....
Ashish Sharma @ +91 8909707597

स्वतन्त्रता दिवस (भारत 15 August)


15 अगस्त 1947
को भारत के निवासियों ने लाखों कुर्बानियां देकर ब्रिटिश शासन से स्वतन्त्रता प्राप्त की थी । यह राष्ट्रीय त्यौहार भारत के गौरव का प्रतीक हैं। इसी महान दिन की याद में भारत के प्रधानमन्त्री प्रत्येक वर्ष लाल किले की प्राचीर से देश को सम्बोधित करते हैं ।

आजादी का रास्‍ता:-

भारतीय स्‍वतंत्रता संग्राम के अनेक अध्‍याय हैं, जो 1857 की बगावत से लेकर जलियांवाला नर संहार तक, असहयोग आंदोलन से लेकर नमक सत्‍याग्रह तक और इसके अलावा अनेक से मिलकर बना है। भारत ने एक लंबी और कठिन यात्रा तय की जिसमें अनेक राष्‍ट्रीय और क्षेत्रीय अभियान शामिल हैं और इसमें दो मुख्‍य हथियार थे सत्‍य और अहिंसा।
हमारे आजादी के संघर्ष में भारत के राजनैतिक संगठनों का व्‍यापक वर्णक्रम, उनके दर्शन और अभियान शामिल हैं, जिन्‍हें केवल एक पवित्र उद्देश्‍य के लिए संगठित किया गया, ब्रिटिश उप निवेश प्राधिकार को समाप्‍त करना और एक स्‍वतंत्र राष्‍ट्र के रूप में प्रगति के मार्ग पर आगे बढ़ना।
14 अगस्‍त 1947 को सुबह 11:00 बजे संघटक सभा ने भारत की स्‍वतंत्रता का समारोह आरंभ किया, जिसे अधिकारों का हस्‍तांतरण किया गया था। जैसे ही मध्‍यरात्रि की घड़ी आई भारत ने अपनी स्‍वतंत्रता हासिल की और एक स्‍वतंत्र राष्‍ट्र बन गया। यह ऐसी घड़ी थी जब स्‍वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने नियति के साथ भेंट 'ट्रिस्‍ट विद डेस्टिनी' नामक अपना प्रसिद्ध भाषण दिया।
आज महात्‍मा गॉधी, नेताजी सुभास चंद्र बोस जैसे कई वीरों के कारण ही हमारा देश स्‍वतंत्र हो पाया है।

Friday, 10 August 2012

श्री कृष्णजन्माष्टमी

      श्री कृष्णजन्माष्टमी भगवान श्री कृष्ण का जनमोत्स्व है। योगेश्वर कृष्ण के भगवद गीता के उपदेश अनादि काल से जनमानस के लिए जीवन दर्शन प्रस्तुत करते रहे हैं। जन्माष्टमी भारत में हीं नहीं बल्कि विदेशों में बसे भारतीय भी इसे पूरी आस्था व उल्लास से मनाते हैं। श्रीकृष्ण ने अपना अवतार भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मध्यरात्रि को अत्याचारी कंस का विनाश करने के लिए मथुरा में लिया। चूंकि भगवान स्वयं इस दिन पृथ्वी पर अवतरित हुए थे अत: इस दिन को कृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाते हैं। इसीलिए श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर मथुरा नगरी भक्ति के रंगों से सराबोर हो उठती है।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन मौके पर भगवान कान्हा की मोहक छवि देखने के लिए दूर दूर से श्रद्धालु आज के दिन मथुरापहुंचते हैं। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर मथुरा कृष्णमय हो जात है। मंदिरों को खास तौर पर सजाया जाता है। ज्न्माष्टमी में स्त्री-पुरुष बारह बजे तक व्रत रखते हैं। इस दिन मंदिरों में झांकियां सजाई जाती है और भगवान कृष्ण को झूला झुलाया जाता है। और रासलीला का आयोजन होता है।उपवास के बारे में
     अष्टमी दो प्रकार की है- पहली जन्माष्टमी और दूसरी जयंती। इसमें केवल पहली अष्टमी है।
स्कन्द पुराण के मतानुसार जो भी व्यक्ति जानकर भी कृष्ण जन्माष्टमी व्रत को नहीं करता, वह मनुष्य जंगल में सर्प और व्याघ्र होता है। ब्रह्मपुराण का कथन है कि कलियुग में भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी में अट्ठाइसवें युग में देवकी के पुत्र श्रीकृष्ण उत्पन्न हुए थे। यदि दिन या रात में कलामात्र भी रोहिणी न हो तो विशेषकर चंद्रमा से मिली हुई रात्रि में इस व्रत को करें। भविष्य पुराण का वचन है- श्रावण मास के शुक्ल पक्ष में कृष्ण जन्माष्टमी व्रत को जो मनुष्य नहीं करता, वह क्रूर राक्षस होता है। केवल अष्टमी तिथि में ही उपवास करना कहा गया है। यदि वही तिथि रोहिणी नक्षत्र से युक्त हो तो 'जयंती' नाम से संबोधित की जाएगी। वह्निपुराण का वचन है कि कृष्णपक्ष की जन्माष्टमी में यदि एक कला भी रोहिणी नक्षत्र हो तो उसको जयंती नाम से ही संबोधित किया जाएगा। अतः उसमें प्रयत्न से उपवास करना चाहिए। विष्णुरहस्यादि वचन से- कृष्णपक्ष की अष्टमी रोहिणी नक्षत्र से युक्त भाद्रपद मास में हो तो वह जयंती नामवाली ही कही जाएगी। वसिष्ठ संहिता का मत है- यदि अष्टमी तथा रोहिणी इन दोनों का योग अहोरात्र में असम्पूर्ण भी हो तो मुहूर्त मात्र में भी अहोरात्र के योग में उपवास करना चाहिए। मदन रत्न में स्कन्द पुराण का वचन है कि जो उत्तम पुरुष है। वे निश्चित रूप से जन्माष्टमी व्रत को इस लोक में करते हैं। उनके पास सदैव स्थिर लक्ष्मी होती है। इस व्रत के करने के प्रभाव से उनके समस्त कार्य सिद्ध होते हैं। विष्णु धर्म के अनुसार आधी रात के समय रोहिणी में जब कृष्णाष्टमी हो तो उसमें कृष्ण का अर्चन और पूजन करने से तीन जन्मों के पापों का नाश होता है। भृगु ने कहा है- जन्माष्टमी, रोहिणी और शिवरात्रि ये पूर्वविद्धा ही करनी चाहिए तथा तिथि एवं नक्षत्र के अन्त में पारणा करें। इसमें केवल रोहिणी उपवास भी सिद्ध है। अन्त्य की दोनों में परा ही लें।

मोहरात्रि:
    श्रीकृष्ण-जन्माष्टमी की रात्रि को मोहरात्रि कहा गया है। इस रात में योगेश्वर श्रीकृष्ण का ध्यान, नाम अथवा मंत्र जपते हुए जगने से संसार की मोह-माया से आसक्तिहटती है। जन्माष्टमी का व्रत व्रतराज है। इसके सविधि पालन से आज आप अनेक व्रतों से प्राप्त होने वाली महान पुण्यराशिप्राप्त कर लेंगे। व्रजमण्डलमें श्रीकृष्णाष्टमीके दूसरे दिन भाद्रपद-कृष्ण-नवमी में नंद-महोत्सव अर्थात् दधिकांदौ श्रीकृष्ण के जन्म लेने के उपलक्षमें बडे हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। भगवान के श्रीविग्रहपर हल्दी, दही, घी, तेल, गुलाबजल, मक्खन, केसर, कपूर आदि चढाकर ब्रजवासीउसका परस्पर लेपन और छिडकाव करते हैं। वाद्ययंत्रोंसे मंगलध्वनिबजाई जाती है। भक्तजन मिठाई बांटते हैं। जगद्गुरु श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव नि:संदेह सम्पूर्ण विश्व के लिए आनंद-मंगल का संदेश देता है।

Monday, 6 August 2012

स्पोकेन इंग्लिश सीखने के 12 सुझाव


12 Ideas to Learn Spoken English
स्पोकेन इंग्लिश सीखने के 12 सुझाव   
1. अपना महौल English बनाएं  : किसी  भी  भाषा  को  सीखने  में  जो  एक  चीज  सबसे  महत्त्वपूर्ण  होती  है  वो  है  हमारा  environment, हमारा  माहौल .  आखिर  हम  अपनी  मात्र -भाषा  छोटी  सी  ही  उम्र   में  कैसे  बोलने  लगते  हैं :- क्योंकि   24X7 हम  ऐसे  माहौल  में  रहते  हैं  जहाँ  वही  भाषा  बोली  , पढ़ी, और  सुनी  जाती  है .  इसीलिए  अंग्रेजी  बोलना  सीखना  है  तो  हमें  यथा  संभव  अपने  माहौल  को  English बना  देना  चाहिए .  इसके  लिए  आप  ऐसा  कुछ  कर  सकते  हैं:
•         हिंदी  अखबार  की  जगह  English Newspaper पढना  शुरू  कीजिये .
•         हिंदी  गानों  की  जगह  अंग्रेजी  गाने  सुनिए .
•         अपने interest के English program / movies देखिये .
•         अपने  room को  जितना  English बना  सकते  हैं  बनाइये ….English posters, Hollywood actors,English  books,Cds ..जैसे  भी   हो  जितना  भी  हो  make it English.

2. ऐसे लोगों के साथ group बनाएं जो आप ही की तरह स्पोकेन इंग्लिश सीखना चाहते हों : कुछ ऐसे  दोस्त   खोजिये  जो  आप   ही  की  तरह  अंग्रेजी  बोलना सीखना  चाहते  हैं .  अगर  आपके  घर  में  ही  कोई  ऐसा  है  तो  फिर  तो  और  भी  अच्छा  है . लेकिन  अगर  ना  हो  तो  ऐसे  लोगों  को  खोजिये , और  वो  जितना  आपके  घर  के  करीब  हों  उतना अच्छा  है . ऐसे दोस्तों  से  अधिक  से  अधिक  बात  करें  और  सिर्फ  English में . हाँ  ,चाहें  तो  आप  mobile पर  भी  यही  काम  कर  सकते  हैं .

3. कोई mentor बना लें: किसी ऐसे व्यक्ति को अपना mentor बना लें जो अच्छी English जानता हो, आपका कोई मित्र, आपका कोई रिश्तेदार, कोई पडोसी, कोई अंग्रेजी सीखाने वाला institute ….कोई भी जो आपकी मदद के लिए तैयार हो. आपको अपने मेंटर से जितनी मदद मिल सके लेनी होगी. अगर आप को मेंटर ना मिले तो भी मायूस होने की ज़रुरत नहीं है आप अपने efforts में लगे रहे , मेंटर मिलने सी आपका काम आसानी से होता लेकिन ना मिलने पर भी आप अपने प्रयास से यह भाषा सीख सकते हैं.

 4. पहले  दिन  से  ही correct English बोलने  का  प्रयास  मत  करें : अगर  आप  ऐसा  करेंगे  तो   आप   इसी  बात  में  उलझे  रह  जायेंगे  की  आप  सही  बोल  रहे  हैं  या  गलत . पहला  एक -दो  महिना  बिना  किसी  tension के   जो  मुंह  में  आये  बोले , ये  ना  सोचें  कि  आप  grammatically correct हैं  या  नहीं .  जरूरी  है  कि  आप  धीरे -धीरे  अपनी  झिझक  को  मिटाएं  .

 5. English सीखने के लिए  Alert रहे : वैसे  तो  मैं  अपनी  spoken English का  श्रेय   अपने  school St.Paul’s को  देता हूँ  पर  अंग्रेजी  के लिए  अपनी  alertness की  वजह  से  भी  मैंने  बहुत  कुछ   सीखा  है . मैं  जब  TV पर  कोई  English program देखता  था  तो  ध्यान  देता  था  की  words को  कैसे  pronounce किया  जा रहा  है , और  किसी  word को  sentence में  कैसे  use  किया  जा रहा  है . इसके  आलावा  मैंने  नए  words सीखने  के  लिए  एक  diary भी  बनायीं  थी  जिसमे  मैं  newspaper पढ़ते  वक़्त जो  words नहीं  समझ  आते  थे  वो  लिखता  था , और  उसका use  कर  के एक  sentence भी  बनता  था , इससे  word की  meaning याद  रखने  में  आसानी  होती  थी .

6. बोल  कर  पढ़ें : हर  रोज  आप  अकेले  या  अपने  group में  तेज  आवाज़  में  English का  कोई  article या  story पढ़ें . बोल -बोल  कर   पढने  से  आपका  pronunciation सही  होगा , और  बोलने  में  आत्मविश्वास  भी  बढेगा .


 7. Mirror का use करें  : मैं  English बोलना  तो  जानता  था  पर  मेरे  अन्दर  भी  fluency की  कमी  थी , इसे ठीक  करने  के  लिए  मैं  अक्सर  अकेले  शीशे  के  सामने  खड़े  होकर   English में  बोला  करता  था . और  अभी  भी  अगर  मुझे  कोई  presentation या  interview देना  होता  है  तो  मैं  शीशे   के  सामने  एक -दो  बार  practice  करके  खुद  को  तैयार  करता  हूँ .  आप  भी  अपने  घर  में  मौजूद  mirror का  इस्तेमाल  अपनी  spoken English improve करने  के  लिए  कीजिये .  शीशे  के  सामने  बोलने  का  सबसे  बड़ा  फायदा  है  कि  आप  को  कोई  झिझक  नहीं  होगी  और  आप  खुद  को  improve कर  पाएंगे .

8. Enjoy the process: English बोलना  सीखेने  को  एक  enjoyment की  तरह  देखें  इसे अपने  लिए  बोझ  ना  बनाएं .  आराम  से  आपके  लिए  जो  speed comfortable हो  उस  speed से  आगे  बढें  . पर  इसका  ये  मतलब  नहीं  है  कि  आप  अपने  प्रयत्न  एकदम  से  कम   कर  दें , बल्कि  जब  आप  इसे  enjoy करेंगे  तो  खुद -बखुद  इस  दिशा  में  आपके  efforts और  भी  बढ़  जायेंगे .  आप  ये  भी  सोचें  कि  जब  आप  fluently बोलने  लगेंगे  तब  कितना  अच्छा लगेगा  , आप  का  confidence भी  बढ़  जायेगा  और  आप  सफलता  की  तरफ  बढ़ने  लगेंगे .

 9. English में सोचना शुरू करें : जब  इंसान  मन  में  कुछ  सोचता  है  तो  naturally वो  अपनी  मात्र  भाषा  में  ही  सोचता  है . लेकिन  चूँकि  आप  English सीखने  के  लिए  committed हैं  तो  आप  जो  मन  में  सोचते  हैं  उसे  भी  English में  सोचें . यकीन  जानिये  आपके  ये  छोटे -छोटे  efforts आपको  तेजी  से  आपकी  मंजिल  तक  पंहुचा  देंगे .

10. ऐसी  चीजें   पढ़ें जो समझने में बिलकुल आसान हों: बच्चों की English comics आपकी हेल्प कर सकती है, उसमे दिए गए pictures आपको story समझने  में हेल्प करेंगे और simple sentence formation भी आम बोल चाल में बोले जाने वाले सेंटेंसेस पर आपकी पकड़  बना देंगे.

11. Internet का use करें : आप स्पोकेन इंग्लिश सीखने के लिए इन्टरनेट का भरपूर प्रयोग करें. You Tube पर available  videos आपकी काफी हेल्प कर सकते हैं.  सही pronunciation और meaning के लिए आप TheFreeDictionary.Com का use कर सकते हैं.  http://ashishkikalamse.blogspot.com पर दिए गए Quotes भी आपकी मदद कर सकते हैं, चूँकि मैंने जो quotes collect किये हैं वो English और Hindi दोनों में हैं तो आप वहां से भी कुछ सीख  सकते हैं और साथ ही महापुरुषों के अनमोल विचार भी जान सकते हैं.

12. Interest मत  loose कीजिये : अधिकतर  ऐसा  होता  है  कि  लोग  बड़े  जोशो -जूनून  के  साथ  English सीखना  शुरू  करते  हैं . वो  ज्यादातर  चीजें  करते  हैं  जो  मैंने  ऊपर  बतायीं , पर  दिक्कत  ये  आती  है  कि  हर  कोई  अपनी  comfort zone में  जाना  चाहता  है . आपकी  comfort zone Hindi है  इसलिए  आपको  कुछ  दिनों  बाद  दुबारा  वो  अपनी  तरफ  खींचेगी  और  ऊपर  से  आपका  माहौल  भी  उसी  को  support करेगा . इसलिए  आपको  यहाँ  पर  थोड़ी  हिम्मत  दिखानी  होगी , अपना  interest अपना  enthusiasm बनाये  रखना  होगा .  इसके  लिए  आप  English से  related अपनी  activities में  थोडा  innovation डालिए . For example : यदि  आप  रोज़ -रोज़  serious topics पर  conversation करने से  ऊब  गए  हों  तो  कोई  abstract topic, या  फ़िल्मी   मसाले  पर  बात  करें ,  कोई इंग्लिश मूवी देखने चले जाएँ, या फिर कुछ और करें जो आपके दिमाग में आये.आप  एक -दो  दिन  का  break भी  ले  सकते  हैं , और  नए  जोश  के  साथ  फिर  से  अपने  mission पर  लग  सकते  हैं . पर  कुछ  ना  कुछ  कर  के  अपना  interest बनाये  रखें . वरना  आपका  सारा  effort waste चला  जायेगा .

       Friends, English एक universal language है, इसे दुनिया भर में अरबों लोग बोलते हैं, तो आप ही सोचिये जो काम अरबों लोग कर सकते हैं भला आप क्यों नहीं!!! बस इतना याद रखिये कि अंग्रेजी  बोलना सीखने का सबसे सरल तरीका है “अंग्रेजी बोलना”  और इस लिए आपको ऐसे लोगों के साथ अधिक से अधिक  रहना चाहिए जिनसे आप इंग्लिश में बात कर सकते हैं. अपनी झिझक मिटाइए और ऐसे हर एक मौके का फायदा उठाइए जहाँ आपको English बोलने का मौका मिल रहा हो.
तो फिर देर किस बात की है बस लग जाइये अपने efforts में और अपने भाषा ज्ञान में अंग्रेजी भी जोड़ लीजिये. All the best! :)
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Ashish Sharma  @ 08909707597

Sunday, 5 August 2012

कड़वा सच ... ...

KADWA SACH.....001

१. दुनिया के 200 से अधिक देश शतरंज खेलने वाले देशों के बीच "विश्वनाथन आनन्द" पाँचवी बार विश्व चैम्पियन बने थे।
 2. आज साइना नेहवाल ने तीसरी बार इंडोनेशियन ओपन सुपर सिरीज़ जीती।
 क्या आपने इन दो खबरों पर मीडिया का कवरेज देखी??? नहीं ना…लेकिन अगर आज कोई क्रिकेटर (भले ही वो आईपीएल हो) ने ५० या १०० रन बनाए होता तो सब न्यूज़ चेनलों मैं खूब चर्चा हो रही होती। लेकिन जब कोई अकेले अपने दम पर जीत हासिल करता है तो सब खामोश हैं।

KADWA SACH.....002
   
"मेक्सिको में आयोजित जी-20 बैठक में दुनिया भर से आने वाले नेताओं में "79 वर्ष" के मनमोहन सिंह सबसे बुजुर्ग हैं।"
 सोचिए जरा !! एक युवा देश भारत की राजनीति कितनी बूढ़ी हो गयी है, जिसको फिर से युवा करने की ज़िम्मेदारी हम युवाओं के हाथों में है क्योंकि.......
 युवा शक्ति वह शक्ति है, जब चाहे ब्रह्मांड हिला दे,
 युवा शक्ति वह शक्ति है, प्याले में तूफान उड़ा दे,
 युवा शक्ति वह शक्ति है, दम भर दे भरी जवानी में,
 युवा शक्ति वह शक्ति है, आग लगा दे पानी में।

KADWA SACH.....003

जब भी कलाम का नाम "रास्ट्रपति" पद के लिया जाता हे तो "सोनिया गाँधी" ऐसे डरने लगती हे जेसे वो "कलाम" ने होकर कोई "मिसाईल" हो और "दस जनपथ" पे गिरने वाली हो ......अगर कलाम "रास्ट्रपति" बनते हे तो "सोनिया गाँधी" की सारी पोल खुल जायेगी....और उनका पाप का गडा फुट जायेगा ...वो तो हमारे "अटल जी" थे जिन्होंने कलाम को "रास्ट्रपति" बनवाया....क्यूंकि उनका "चरित्र" दूध से धुला था....।

FRIENDSHIP DAY

अंतरराष्ट्रीय
मित्रता दिवस (FRIENDSHIP DAY) मना दोस्ती के लिए एक दिन है. कई दक्षिणी देशों, दक्षिण अमेरिकी देशों में कई वर्षों से मनाया जाता है, विशेष रूप से पैराग्वे में,  जहां पहली बार विश्व FRIENDSHIP DAY, 1958 में प्रस्तावित किया गया था .


यह "दोस्तों के सम्मान में समर्पित एक दिन " की परंपरा है, 1919 से यह वास्तव में  तारीखें. फूल, पत्ते और कलाई बैंड उपहार, "मैत्री दिवस के बदले" देने की इस अवसर की एक लोकप्रिय परंपरा है
     
 मैत्री दिवस समारोह के अलग अलग देशों में अलग अलग तारीखों पर होते हैं. प्रथम विश्व मैत्री दिवस 30 जुलाई 1958 के लिए प्रस्तावित किया गया था. 27 अप्रैल 2011 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने   30 जुलाई को आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय मैत्री दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की. हालांकि, भारत सहित कुछ देशों में, अगस्त के पहले रविवार को मैत्री दिवस  के रूप में मनाया जाता है. 2011 के बाद से संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय मैत्री दिवस के रूप में 30 जुलाई को पहचानता है.
 
 
 
" Two may talk together under the same roof for many years, yet never really meet; and two others at first speech are old friends. "
- Mary Catherwood
" Friendship is unnecessary, like philosophy, like art... It has no survival value; rather is one of those things that give value to survival. "
- C. S. Lewis
" Anybody can sympathise with the sufferings of a friend, but it requires a very fine nature to sympathise with a friend's success. "

Friday, 3 August 2012

उफ ! ये चाहत (Story)

                     आज फिर दर्द ए गम के धागे मेँ पिरोकर तेरे ख्याल के फूल,
                     उल्फत के दश्त से चुनकर आशनाई के माहोँ साल के फूल ।
                     तेरी दहलीज पे सजा आए फिर तेरी याद पे चढ़ा आए,
                     बांधकर आरजू के पल्लू मेँ जुदाई की रात और विसात के फूल ॥

           My dear friends!!!
           आज, मैं तुम्हारे साथ एक कहानी साझा करने जा रहा हूँ, जिसका शीर्षक है "उफ ! ये चाहत"
           मुझे आशा है कि आप इस कहानी का आनंद 
 उठायेँगे, तो आइये शुरू करते हैँ........

      न जाने रात अपने किस पहर से गुजर रही थी कि अचानक दरवाजा खटखटाने की आवाज ने डॉ सागर को किताब से नजरें हटाकर दरवाजे की ओर देखने पर मजबूर कर दिया, लेकिन उनके दरवाजे तक पहुँचने से पहले ही बाहर से ........(continue, waqt milte hi story ko aage likhunga)....

Thursday, 2 August 2012

मेरी तस्वीर

    यह मेरी वास्तविक तस्वीर है। इस भरतपुर संग्रहालय में लिया गया था, मोबाइल द्वारा लिया गया था, तो छवि बहुत ज्यादा स्पष्ट नहीं है, लेकिन मैं उम्मीद करता हूँ, आप इस पर में कुछ कहना पसंद करेंगे।

कुछ कमेंट्स इस प्रकार हैं ---
1. आप 23 नहीं 30 हो --- रितेश लखनऊ
2. आप को कोई लड़की प्यार नहीं कर सकती -- अर्पिता, नागौर
3. आप अपने बारे में कम और दूसरों के बारे में  अधिक बातें करते हो और मुस्कराते नहीं हो -- अस्वा गुल, (पाकिस्तान)
4. काफी deciplined लगते हो -- Sacchi , जम्मू


My Pic 2 :-

Hi, This is Ashish Sharmaयह मेरा दूसरा फोटो है। यह करीब एक साल पुराना है।
यह मेरी ex गर्लफ्रेंड ने मोबाइल द्वारा eye हॉस्पिटल में लिया था 
और उसने अपना चश्मा मुझे पहना दिया था ।
वो अपनी eyes चेक कराने गयी थी और मैं उसके साथ था ।
 आपको कैसा लगा ? अपने कमेंट्स जरुर दें....