
हम भी कभी मुस्कराया करते थे,
उजाले में भी शोर मचाया करते थे,
उसी दिये ने जला दिए मेरे हाथ।
जिसको हम हवा से बचाया कतरे थे।।
न मिला गम तो बर्बादी के फ़साने कहाँ जाते,
दुनिया अगर होती चमन तो वीराने कहाँ जाते,
चलो अच्छा हुआ अपनों में कोई तो गैर निकला ?
अगर सभी होते अपने तो बेगाने कहाँ जाते।।
-आशीष शर्मा
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