15 अगस्त 1947 को भारत के निवासियों ने लाखों कुर्बानियां देकर ब्रिटिश शासन से स्वतन्त्रता प्राप्त की थी । यह राष्ट्रीय त्यौहार भारत के गौरव का प्रतीक हैं। इसी महान दिन की याद में भारत के प्रधानमन्त्री प्रत्येक वर्ष लाल किले की प्राचीर से देश को सम्बोधित करते हैं ।
आजादी का रास्ता:-
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अनेक अध्याय हैं, जो 1857 की बगावत से लेकर जलियांवाला नर संहार तक, असहयोग आंदोलन से लेकर नमक सत्याग्रह तक और इसके अलावा अनेक से मिलकर बना है। भारत ने एक लंबी और कठिन यात्रा तय की जिसमें अनेक राष्ट्रीय और क्षेत्रीय अभियान शामिल हैं और इसमें दो मुख्य हथियार थे सत्य और अहिंसा।हमारे आजादी के संघर्ष में भारत के राजनैतिक संगठनों का व्यापक वर्णक्रम, उनके दर्शन और अभियान शामिल हैं, जिन्हें केवल एक पवित्र उद्देश्य के लिए संगठित किया गया, ब्रिटिश उप निवेश प्राधिकार को समाप्त करना और एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में प्रगति के मार्ग पर आगे बढ़ना।
14 अगस्त 1947 को सुबह 11:00 बजे संघटक सभा ने भारत की स्वतंत्रता का समारोह आरंभ किया, जिसे अधिकारों का हस्तांतरण किया गया था। जैसे ही मध्यरात्रि की घड़ी आई भारत ने अपनी स्वतंत्रता हासिल की और एक स्वतंत्र राष्ट्र बन गया। यह ऐसी घड़ी थी जब स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने नियति के साथ भेंट 'ट्रिस्ट विद डेस्टिनी' नामक अपना प्रसिद्ध भाषण दिया।
आज महात्मा गॉधी, नेताजी सुभास चंद्र बोस जैसे कई वीरों के कारण ही हमारा देश स्वतंत्र हो पाया है।
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