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Wednesday, 19 September 2012

क्या सपने कभी साकार होते हैं?

     प्रिय दोस्तों!!

     आज मैंने एक शख्स के मुह यह सुना, "सपने कभी साकार नहीं होते हैं?"
क्या आप भी यही मानते हैं? अगर हाँ, तो मैं आपकी बात से सहमत नहीं हूँ।
क्योंकि सपने भी दो प्रकार के होते हैं---

     1. बंद आँखों से (सोते हुए) देखा गया सपना,
     2. खुली आँखों से देखा गया सपना
     बंद आँखों से देखा गया सपना पूरा हो न हो, लेकिन खुली आँखों से देखा गया सपना जरुर पूरा किया जा सकता है। अब आप सोच रहे होंगे कि खुली आँखों से कौन से सपने देखे जाते हैं? आईये मैं आप को बताता हूँ। खुली आँखों से देखे जाने वाले सपनो से मेरा अभिप्राय उन तमाम चीजों से है जिनके बारे में सोचकर ही हम रोमांचित हो जाते हैं, जैसे कि- बंगला, गाडी, बैंक बैलेंस ...आदि।

हर इन्सान इन चीजों को पाने के लिए मचलता है, लेकिन अगले ही पल कहता है, "क्यों मैं इनके बारे में सोच रहा हूँ , क्यों ऐसे सपने देख रहा हूँ जो कभी पुरे नहीं हो सकते?" वह ऐसा इसलिए कहता है, क्योंकि उसका सोचना है कि सपने कभी पुरे नहीं होते , परन्तु मेरा कहना है कि अगर इन्सान चाहे तो क्या नहीं कर सकता? अगर वह चाहे तो इस दुनिया को भी बदल सकता है, सपने तो बहुत छोटी सी बात है।

किसी काम में सफलता यूँही नहीं मिल जाती। ऐसे चांसेस न के बराबर होते हैं कि जिस काम को हम करना कहते हैं और वो अनायास ही हो जाता है और हमें एफ्फोर्ट्स नहीं लगाने पड़ते। परन्तु किसी काम में सफलता पाने के लिए हमें दो चीजों (Fectors ) की आवश्यकता होती है ---
    1. Planning
    2. Action
इन दोनों को एक सही percentage में Distribute करके काम किया  तो कोई भी और कितना भी जटिल या मुश्किल सपना भी पूरा किया जा सकता है।

इन्सान जब यह कहता है की वो काम तो कभी नहीं किया जा सकता, तो इसके पीछे मुख्य वजह होती है-- ऊपर बताये गए दोनों fectors का सही तरीके से उपयोग न कर पाना । कोई तो केवल plannings कर पाता है, Action नहीं, तो कोई केवल Action परन्तु प्लान्निंग्स नहीं और कोई कोई तो इनमे से कोई भी नहीं। अब सोचने की बात है, जब किसी काम को गलत तरीके से या अधूरे तरीके से किया जाये तो कैसे वो कार्य पूरा हो सकता है?  फिर कहते हैं "सपने कभी पुरे नहीं होते हैं, ऐसे सपने देखने भी नहीं चाहिए जो पुरे नहीं हो सकते हैं।" आप ने उनको पूरा करने का दिल से प्रयास ही नहीं किया  अथवा गलत ट्रैक पर किया तो कैसे पूरा हो जायेंगे?

मानता हूँ कुछ कार्य इन्सान की हद से बाहर हैं, जैसे-"चाँद को तोड़कर लाना" परन्तु ऊपर बताई गयी चीजों को तो हासिल किया जा सकता है। और आज हमारे सम्मुख ऐसे अनेको प्रमाण हैं, जिन्होंने हर मुश्किल से टकराते हुए अपने सपनों को पूरा कर दिखाया है--टाटा, बिडला, अम्बानी ....आदि, तो फिर हम और आप क्यों नहीं?

अतः दोस्तों! आपको अपने अन्दर एक जज्वा पैदा करना है और अपने आप से बार बार कहते रहना है- मैं कर सकता हूँ ( I can do).

Next लेख में आप पढेंगे--"कैसे करें अपने सपनो को साकार?"

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