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Friday, 3 August 2012

उफ ! ये चाहत (Story)

                     आज फिर दर्द ए गम के धागे मेँ पिरोकर तेरे ख्याल के फूल,
                     उल्फत के दश्त से चुनकर आशनाई के माहोँ साल के फूल ।
                     तेरी दहलीज पे सजा आए फिर तेरी याद पे चढ़ा आए,
                     बांधकर आरजू के पल्लू मेँ जुदाई की रात और विसात के फूल ॥

           My dear friends!!!
           आज, मैं तुम्हारे साथ एक कहानी साझा करने जा रहा हूँ, जिसका शीर्षक है "उफ ! ये चाहत"
           मुझे आशा है कि आप इस कहानी का आनंद 
 उठायेँगे, तो आइये शुरू करते हैँ........

      न जाने रात अपने किस पहर से गुजर रही थी कि अचानक दरवाजा खटखटाने की आवाज ने डॉ सागर को किताब से नजरें हटाकर दरवाजे की ओर देखने पर मजबूर कर दिया, लेकिन उनके दरवाजे तक पहुँचने से पहले ही बाहर से ........(continue, waqt milte hi story ko aage likhunga)....

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