जो चाहती है दुनिया वो मुझ से नहीं होगा,
समझौता कोई ख्वाब के बदले नहीं होगा।
अब रात की दीवार को ढाना है जरूरी,
ये काम लेकिन मुझसे अकेले नहीं होगा।
खुदफहमी अभी तक यहीं थी कारे जुनूं मेँ,
जो मैं नहीं कर पाया तो किसी से नहीं होगा॥
अंजाने से इक खौफ से दिल परेशान क्योँ है,
जब तय है कि कुछ वक्त से पहले नहीं होगा॥
-आशीष शर्मा
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