गॉड पार्टिकल क्या है?
गॉड पार्टिकल को हिग्स बोसोन भी कहा जाता है और यह परमाणु से भी छोटा कण है। वैग्यानिको का मानना है कि इसी की वजह से कणों में वजन होता हैं। यह कण व्रहमांड में हर जगह मौजूद है। अगर कण में वजन न होता तो तारे, ग्रह और आकाशगंगायेँ न होती और न ही जीवन होता।
1970 के दशक में सामने आये भौतिकी के स्टैँडर्ड मॉडल के मुताबिक व्रहमांड 12 मौलिक कणों से मिलकर बना है। वैज्ञानिकोँ ने 11 कणों को तो खोज लिया था लेकिन 12 वे कण की उनको तलाश थी। लेकिन इसके लिये इतनी ऊर्जा की जरूरत थी, जितनी कि बिगबैँग यानि कि 14 अरब साल पहले व्रहमांड का जन्म के समय रही होगी। इसके लिए जेनेवा के पास 27 किमी लम्बी गोलाकार सुरंग " लार्ज हैडर्न कॉलोइडर" बनायी गयी। इस सुरंग में प्रोटोनोँ को प्रकाश की चाल से विपरीत दिशाओं से छोड़कर आपस में टकराया गया। यहां वो सब परिस्तिथियां पैदा की गयी जो अरबोँ साल पहले बिगबैँग के दौरान थीँ। इससे वजूद में 4 जुलाई दिन बुधवार को आये कण को ही गॉड पार्टिकल माना जा रहा है।
हिग्सबोसोन के कुछ गुण भारतीय वैज्ञानिक सत्येँद्र नाथ बोस द्वारा किसी कण के गुणोँ को बताने वाले फॉर्मूला का पालन करते हैँ । बोस जी ने अपने इस फॉर्मूले की सहायता से गॉड पार्टिकल के गुणोँ की व्याख्या बहुत पहले ही कर दी थी । अगर इस कण के सभी गुण बोस जी के फॉर्मूले से मैच करते हैँ तो यह कण हिग्षबोसोन ही है। हिग्सबोसोन मेँ हिग्स नाम ब्रिटिश वैज्ञानिक "पीटर हिग्स" और बोसोन नाम भारतीय "सत्येँद्र नाथ बोस" के नाम पर पड़ा।
गॉड पार्टिकल कि उत्पत्ति कैसे हुई ?
क्वार्क और ग्लुआन की प्रोटोन्स के बीच टक्कर हुई और काफी ऊर्जा निकली जिससे गॉड पार्टिकल की उत्पत्ति हुई। इस पार्टिकल का द्रव्यमान प्रोटोन से 100 से 200 गुना ज्यादा होता है और एक सेकंड के अरबवे समय में यह दूसरे कणों में बदल जाता है। प्रयोग में हिग्सबोसोन की उत्पत्ति के सबूत LHC में लगे डिटेक्टर से पाऐ गए।
गॉड पार्टिकल के फायदे-
गॉड पार्टिकल को हिग्स बोसोन भी कहा जाता है और यह परमाणु से भी छोटा कण है। वैग्यानिको का मानना है कि इसी की वजह से कणों में वजन होता हैं। यह कण व्रहमांड में हर जगह मौजूद है। अगर कण में वजन न होता तो तारे, ग्रह और आकाशगंगायेँ न होती और न ही जीवन होता।
गॉड पार्टिकल कि उत्पत्ति कैसे हुई ?
गॉड पार्टिकल के फायदे-
1. ब्रहमांड की उत्पत्ति के अनसुलझे रहस्योँ से उठेगा पर्दा
2. क्षणिक अस्तित्व वाले कणोँ का भी पता लगाया जा सकेगा
3. इंटरनेट की गति को तूफानी रफ्तार देने में मदद मिलेगी
4. आंतरिक्ष विमान तकनीक को उन्नत बनाया जा सकेगा
5. बीमारियों के इलाज में भी अहम भूमिका हो सकती है।
आखिर सच क्या है ?
जरूरी नहीँ कि जिस कण को हिग्स बोसोन माना जा रहा है वो हिग्स बोसोन ही हो जब तक कि इस कण के सभी गुणों के परीक्षण नहीं हो जाते है.
कुछ अन्य संबंधित तथ्य :-
1. 15000 वैज्ञानिक (100 से अधिक भारतीय सहित)
2. 480 अरब रुपए का खर्च
3. -271 डिग्री सेल्सियस तापमान (LHC का)
4. 8000 टन चुंबक रखा गया था
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कुछ अन्य संबंधित तथ्य :-
1. 15000 वैज्ञानिक (100 से अधिक भारतीय सहित)
2. 480 अरब रुपए का खर्च
3. -271 डिग्री सेल्सियस तापमान (LHC का)
4. 8000 टन चुंबक रखा गया था
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