जिन को खोजते हैं सपनो में,
वो हक़ीक़त में नहीं है;
जो हक़ीक़त में है सामने,
वो सपनो में हमारे नही है.
जिन पलो की कलपना भी,
खुशियों से भर देती थी दामन
आज पता लगा की
वो पल भी हमारे नही है
चाहा था जिसको दिल से,
उसने था ना चाहा दिल से
कह गया वो एक दिन;
हम तुम्हारे, तुम हमारे नही है
-आशीष शर्मा (31/07/2012, 02:06 AM)
वो हक़ीक़त में नहीं है;
जो हक़ीक़त में है सामने,
वो सपनो में हमारे नही है.
जिन पलो की कलपना भी,
खुशियों से भर देती थी दामन
आज पता लगा की
वो पल भी हमारे नही है
चाहा था जिसको दिल से,
उसने था ना चाहा दिल से
कह गया वो एक दिन;
हम तुम्हारे, तुम हमारे नही है
-आशीष शर्मा (31/07/2012, 02:06 AM)
1 comment:
Yah poem aapko kesi lagi, krapaya apne comments post kare...
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